आयुर्वेद का अर्थ औषधि - विज्ञान नही है वरन आयुर्विज्ञान अर्थात '' जीवन-का-विज्ञान'' है

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Friday 21 May 2010

अजीब सी तकलीफ है

हाँ वो तकलीफ अजीब  सी  ही थी ,लगता था जैसे प्राण ही निकल जायेंगे और दवा !!बिलकुल मामूली . मैं आज अपना अनुभव आपके साथ बाँट रही हूँ ----
करीब १० दिनों से मूत्र विसर्जन के वक्त हलकी जलन सी होती थी .देश-विदेश में फैले मरीज और उनके परिजनों की फोनकाल ,दवाएं तैयार कराना और पार्सल  के चक्कर में मैं जलन की उपेक्षा करती  रही. इक हफ्ता बीतते- बीतते पसीना जरूरत से ज्यादा होने लगा ,इतनी गर्मी लगे कि  बैचैनी  महसूस होने लगती थी और ग्यारहवें दिन तो शाम  के बाद से यूरिन डिस्चार्ज की हिम्मत ही नहीं पड़ती थी ,इतनी तेज जलन और सुई जैसी चुभन कि  बस ,यूं लगता था कि यूरीन डिस्चार्ज से अच्छा है कि  प्राण ही डिस्चार्ज कर दिए जाएँ ,सुबह होते होते तो खड़े होने की ताकत ही न बची ,खैर किसी तरह से दिमाग को एकाग्र किया तो दवा याद पड़ी  .विश्वास कीजिए जब खुद को तकलीफ होती है तो सारी दवाएं भूल जाती हैं ,लोगों ने सच ही कहा है कि डॉ. अपना ईलाज खुद कभी नहीं कर सकता . मैंने भी अपना इलाज खुद नहीं किया ,मम्मी की एक बार दी हुई दवा याद आ गयी ,बस दो घंटे में तकलीफ हवा हो गयी और अगले दिन तो तबीयत   एकदम चकाचक .पेट के नीचे इक हिस्सा होता है जिसे आम बोलचाल की भाषा में पेडू भी कहते हैं ,जब आपके शरीर [मूत्राशय] में मूत्र रुकेगा अर्थात यूरिया [जहर ]आपके कोमल शरीर में रुकेगा तो दस और बीमारियाँ पैदा होगी और जब पेडू दर्द करता है तो लोग कहते हैं कि पेट दर्द कर रहा है और ये दर्द जननांगों को ज्यादा प्रभावित करता है .अब आप खुद सोचें कि एक मूत्र पाल पोस कर आप कितनी बीमारियों को निमंत्रित कर लेते हैं ,मुझे तो त्रिलोक नजर आ गये .......

खैर....चलिए दवा पर बात करें --
दो चम्मच जीरा लीजिये उसे तवे पर भून लीजिये [तवा या कढ़ाही लोहे की हो ] आंच से नीचे उतारिये तीन या चार मिनट रुकिए फिर तवे ही पर कुच्कुचा लीजिये [पीस लीजिये] .अब उसमें आधा चम्मच नमक मिलाएं .तैयार चूरन को तीन बराबर भागों में बांटिये
एक भाग तुरंत पानी से निगल जाएँ और दूसरा भाग दो घंटे बाद और तीसरा भाग अगले दिन सुबह खाली पेट
बस दर्द ख़त्म ,रुका हुआ मूत्र सारा बाहर निकल जाएगा ,बिना दर्द के.
अब आपको अपना मूत्राशय शुद्ध  [साफ़] करना है
१००ग्राम धनिया लीजिये, दाने वाली,हरी पत्तियों वाली नहीं .और 50 ग्राम सोंठ ,दोनों को हल्का  सा कूट लीजिये, चूरन नहीं करना है ,अब उन्हें ३०० ग्राम पानी में उबालिए . जब आधा से भी थोड़ा कम पानी बचे तो उतार कर छान लीजिये ,ठंडा कीजिये ,रोज २५ ग्राम पीजिये ,१० दिन पी लिया तो मूत्राशय में पथरी ,सूजन ,संक्रमण जैसी चीजें भी ख़त्म हो जायेंगी  
अगर आपका वजन सामान्य से अधिक है तो ये आपको ५० ग्राम पीना होगा 
अंत में एक बात पानी खूब ज्यादा पीते रहिये ,और जैसे मैंने आपको बताने में संकोच नहीं किया वैसे ही आप भी संकोच त्याग कर घर के सारे लोगों का मूत्राशय शुद्ध करने पर तुल जाइए  .ये १००- ५०/- का खर्च आपके पचासों हजार रु बचाएगा
9889478084

 इन आलेखों में पूर्व विद्वानों द्वारा बताये गये ज्ञान को समेट कर आपके समक्ष सरल भाषा में प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयत्न मात्र है .औषध प्रयोग से पूर्व किसी मान्यताप्राप्त हकीम या वैद्य से सलाह लेना आपके हित में उचित होगा

15 टिप्पणियाँ:

मनोज कुमार said...

22.05.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह 06 बजे) में शामिल करने के लिए इसका लिंक लिया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/

राज भाटिय़ा said...

बहुत अच्छी जानकारी जी मै अभी बनबाता हुं, दोनो चीजे है हमारे पास.
धन्यवाद

sangeeta swarup said...

बहुत अच्छी जानकारी....आभार

बेचैन आत्मा said...

पेट दर्द होने पर जीरा तो मेरी माँ भी भून कर खिलाती थीं ...फायदा क्यों होता है ,,यह आज पता चला.

Udan Tashtari said...

बढ़िया जानकारी दे दी..वजन ज्यादा से क्या तात्पर्य है..क्या यह वजन कम करने का काम करता है या ज्यादा वजन वालों की किडनी साफ करने के लिए ज्यादा की जरुरत पड़ती है?

Vijay Kumar Sappatti said...

bahut achi jjankari ... alka ji , main bhi banwaata hoon ye ghar me ... aapko badhayi ho .. aap bahut accha kaary kar rahi hai ..

abhaar

Ashish (Ashu) said...

अरे वाह बहुत काम की जानकारी हे...

सुनील दत्त said...

अति लाभदायक जानकारी
बैसे ऐसी समस्या में गोक्षादी गुगल बहुत लाभदा.क होता है दो गोली पानी के साथ समस्या पेसाव आते ही गायब वाकी जानकारी बैद्य जी से या फिर औषध दर्शन से

ओम पुरोहित'कागद' said...

बहुत ही बढ़िया नुस्खा बताया है आप ने।मेरी मां बहुत नुस्खे जानती हैँ तथा छोटी मोटी बीमारियां ऐसे ही नुस्खोँ से ठीक कर देती हैँ।कई M.B.B.S. डाक्टर तक उन से दवा लेते हैँ।आपका बताया नुस्खा मेरा आजमाया हुआ है।

zeal said...

cool info. Thanks Alka ji.

vinay said...

लाभकारी जानकारी,उपयोग करके देखेअगें

दिगम्बर नासवा said...

बहुत अच्छी जानकारी ... बहुत ही बढ़िया नुस्खा ...

E-Guru Rajeev said...

बहुत ही बढ़िया नुस्खा बताया है.
आपका इस प्रकार से नुस्खे बांटना सभी को लाभान्वित करता है और और आपके न रहने के बाद भी आपके इस ब्लॉग से पूरी दुनिया लाभान्वित होती रहेगी.
अरे...अरे...आप सौ साल जियें...मेरा मतलब तो है कि आप एक प्रकार से विश्व-सेवा कर रही हैं.

(लोग देश-सेवा या समाज-सेवा करते हैं पर आप तो विश्व-सेवा कर रही हैं.)

Apanatva said...

alka jee कुच्कुचा kise kahte hai kanha milega ....ye kya jadee bootee hai ?english me ise kya kahte hai...

Mrs. Asha Joglekar said...

Bahut hee badhiya aur kam ki jankari. Bahut dino bad aapke blog par aaee. Padh kar hamesha ki trah aapke khajane ka ek aur anmol moti mila.